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स्वतंत्र भारत में पहली बार कुछ हुआ है,
संभलके रहना यारों यहां दादरी हुआ है।

पैंसठ बरस वतन कितना शांत था,
ना किसी हिंदू मुस्लिम सीख का लहू कभी बहा था,
ना दंगे, ना फसाद, ना कही कोई फरियाद,
इस देशमें हुइ ‘पहली’ हत्याने सबकुछ बदला है,
संभलके रहना यारों यहां दादरी हुआ है।

अंग्रेजोने हमें जाते जाते फरमाया,
ऐ मुसलमानों खतरा है तुम्हे हिंदुओंसे,
आज कांग्रेस को सत्तासे हटाया तो,
जाते जाते उसने वही संदेशा दोहराया है,
संभलके रहना यारों यहां दादरी हुआ है।

धर्मनिरपेक्ष मेरे देश में, किसी धर्म कि सरकार हो नही सकती,
दिल्ली बिहार चुनाव, जिंदा मिसाले है इसकी,
प्याज अरहर दाल पर यहां गिरती सरकारे,
पर पुरस्कार लौटानेवालों, आपकी नाराजगी जायाज है,
संभलके रहना यारों यहां दादरी हुआ है।

कल्याण के किसी युवक को आयएसआयएस कहेगा,
शाहरूख अमीर जहां महफूज नहीं, वहां तेरी औकाद क्या,
हथियार गर वो उठाये तो उसे सफाई देना,
पर कलाकारों आपका डर बेबुनियाद कहां है,
संभलके रहना यारों यहां दादरी हुआ है।

स्वतंत्र भारत में पहली बार कुछ हुआ है,
संभलके रहना यारों यहां दादरी हुआ है।

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