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<ओवैसी और जावेद अख्तर आमने सामने मिल रहे हैं।>

ओवैसी: जानते हो जावेद मैंनै तुम्हें, यहां मिलने क्युं बुलाया?

जावेद: मेरे घर आना तुम्हारे शानके खिलाफ है भाई, और तुम्हारे पार्टी आफिस जाना मेरे असुलोंके खिलाफ।

ओवैसी: जावेद तुम नहीं जानते कि तुम जिस रास्तेपर चल रहे हो उसका अंजाम क्या हो सकता है?

जावेद: हो सकता है मैं जिस रास्तेपर चल रहा हूं उससे शायद मुझे जन्नत ना नसीब हो, पर तुम जिस रास्तेपर चल रहे उसमें तुम्हें जन्नत कतई मिल नहीं सकती भाई।

ओवैसी: जावेद तुम मेरे विचारोंको क्युं नहीं मानते?

जावेद: मेरी देशभक्ती, मेरा देशप्रेम इसकी इजाजत नहीं देते।

ओवैसी: ऊफ ये तुम्हारी देशभक्ती, तुम्हारा देशप्रेम। किस कामकी है तुम्हारी देशभक्ती? तुम्हारी सारी देशभक्तीको मिलाकर दो अच्छे दिन नहीं लाये जा सकते जावेद। क्या दिया है तुम्हे देशभक्तीने? एक पद्मश्री, एक पद्मभुषण, एक साहित्य अकादमी पुरस्कार! देखो ये वहीं मैं हूं, वहीं तुम हो। आज मेरे पास पॉलिटीकल पार्टी है, जिसकी लोकसभामें एक सीट है, महाराष्ट्र, तेलंगणा असेंब्लीमें सीटे हैं, कई महानगर पालिकाओंमें सीटे हैं। क्या है, क्या है तुम्हारे पास?

जावेद: मेरे पास भारत माता है।

(Ref: 16-Mar-2016 Javed Akhtar slams Owaisi, chants ‘Bharat Mata ki jai’ in Rajya Sabha)

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